भारत में बैंकिंग का इतिहास (History of Banking in India)

देश की बैंकिंग प्रणाली देश का अर्थव्यवस्था और आर्थिक विकास का आधार है। यह देश के वित्तीय क्षेत्र का सबसे प्रमुख हिस्सा है क्योंकि यह देश के वित्तीय क्षेत्र के 70% से अधिक धनराशि के प्रवाह के लिए जिम्मेदार है।

इंडियन बैंकिंग कम्पनीज एक्ट 1949 (Indian Banking Companies Act 1949) के अनुसार बैंकिंग का अर्थ है कर्ज देने अथवा अन्य प्रकार से काम में लाने के लिए जनता से जमा रूप में ऐसी रकम स्वीकार करना, जिसे मांगने पर अथवा अन्य तरीके से लौटाया जाए और जो चेक अथवा मांग-पत्र आदि के द्वारा निकाला जा सके।

इंडियन बैंकिंग कम्पनीज एक्ट 1949 (Indian Banking Companies Act 1949) को 1 मार्च 1966 को बैंकिंग नियंत्रण अधिनियम 1949 (Banking Regulations Act 1949) के रूप में परिवर्तित कर दिया गया।

भारतीय बैंकों का विकास (Development of Indian Bank)

भारत में बैंकिंग प्रणाली के इतिहास को तीन चरणों में वर्गीकृत किया जा सकता है-

  • पूर्व-स्वतंत्रता चरण (Pre-Independence Phase) (1786-1947)
  • स्वतंत्रता के बाद का चरण (Post- Independence Phase) (1947 से 1991 तक)
  • उदारीकरण चरण (Liberalization Phase) (1991 से अब तक)

History of Banking: पूर्व-स्वतंत्रता चरण (Pre-Independence Phase) (1786-1947)

  • मेसर्स एलेक्‍जेंडर एंड कंपनी ने 1770 में दि बैंक ऑफ हिंदुस्‍तान के नाम से सबसे पहले यूरोपियन बैंक की स्‍थापना की। यह बैंक 1832 में टूट गया।
  • 2 जून 1806 को ईस्‍ट इंडिया कंपनी (East India Company) के आज्ञापत्र के अनुसार, बैंक ऑफ कलकत्ता (Bank of Calcutta) की स्‍थापना की गई। 2 जनवरी 1809 में इसे बैंक ऑफ बंगाल (Bank of Bengal) के नाम से अधिकार-पत्र मिला।
  • बैंक ऑफ बंगाल (Bank of Bengal) को 1823 में नोट चलाने की अनुमति दी गई। साथ ही 1839 में इसे शाखाएं (Branches) खोलने और भारतीय विनिमय का काम करने की अनुमति दी गई।
  • 15 अप्रैल 1840 को बैंक ऑफ बॉम्बे (Bank of Bombay) और 1 जुलाई 1843 को बैंक ऑफ मद्रास (Bank of Madras) की स्‍थापना की गई।
  • 1881 में अवध कॉमर्शियल बैंक (Oudh Commercial Bank or Awadh Commercial Bank) की स्‍थापना की गई। इसका हैड क्वार्टर फैजाबाद में था। यह भारत का पहला बैंक था जिसमें सभी बोर्ड डायरेक्टर भारतीय थे। 1958 में इसने काम करना बंद कर दिया।
  • 24 अप्रैल 1865 को इलाहाबाद बैंक (Allahabad Bank) की स्थापना की गई थी। यह भारतीय स्वामित्व वाला पहला बैंक था।
  • 19 मई 1894 को पंजाब नेशनल बैंक (Punjab National Bank) की स्‍थापना की गई।
  • 1906 से 1913 के बीच भारत में लगभग 18 बैंक स्‍थापित किए गए।
  • 1 जुलाई 1906 को केनरा बैंक (Canara Bank), 7 सितंबर 1906 को बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India) की स्‍थापना की गई।
  • 15 अगस्‍त 1907 को इंडियन बैंक (Indian Bank) की स्‍थापना की गई।
  • 24 जून 1908 को पंजाब एंड सिंध बैंक (Punjab & Sind Bank), 20 जुलाई 1908 को बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) की स्‍थापना की गई।
  • 21 दिसंबर 1911 को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (Central Bank of India) की स्‍थापना की गई।
  • 2 अक्‍टूबर 1913 को बैंक ऑफ मैसूर (Bank of Mysore) की स्‍थापना की गई।
  • 11 नवंबर 1919 को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (Union Bank of India) की स्‍थापना की गई।
  • भारत में 1913 तक लगभग 560 बैंक स्‍थापित किए गए थे। अधिकांश बैंक बिना समुचित आधार के खोले गए थे इसलिए 1913-1917 के बैंकिंग संकटकाल के दौरान अधिकांश बैंक बंद हो गए।
  • 27 जनवरी 1921 को बैंक ऑफ बंगाल (Bank of Bengal), बैंक ऑफ बॉम्बे (Bank of Bombay) और बैंक ऑफ मद्रास (Bank of Madras) का विलय (Merger) कर इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया (Imperial Bank of India) बनाया गया। 1955 में इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया का राष्‍ट्रीयकरण कर दिया गया और 1 जुलाई 1955 को इसका नाम स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (State Bank of India) कर दिया गया।
  • 1926 में हिल्‍टन यंग कमिशन (Hilton Young Commission) ने भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) की स्‍थापना की सिफारिश की।
  • 8 सितंबर 1933 को विधानसभा में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया बिल रखा गया, जो 1934 में एक एक्ट के रूप में पारित हुआ। इसी एक्ट के तहत भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India-RBI) की स्थापना हुई और इसने 1 अप्रैल, 1935 से कार्य शुरू कर दिया।
  • 1929 से 1936 के बीच लगभग 481 बैंक बंद हो गए।

History of Banking: 1947 से 1991 तक

  • स्वतंत्रता के समय संपूर्ण बैंकिंग क्षेत्र निजी स्वामित्व में था। देश की ग्रामीण आबादी को अपनी आवश्यकताओं के लिए छोटे उधारदाताओं पर निर्भर होना पड़ता था। इसके चलते सरकार ने बैंकों के राष्‍ट्रीयकरण (Nationalisation of Banks) का निर्णय लिया।
  • भारत में बैंकिंग प्रणाली को सुदृढ़ करने और अर्थव्यवस्था के बेहतर विकास के लिए भारत सरकार (Indian Government) ने 1948 में रिजर्व बैंक लोक-स्वामित्व हस्तांतरण एक्ट (Reserve Bank Transfer to Public Ownership Act) पास कर 1 जनवरी 1949 को भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India-RBI) का राष्ट्रीयकरण (Nationalisation) कर दिया।
  • 16 मार्च 1949 को बैंकिंग विनियमन अधिनियम (Banking Regulation Act 1949) लागू किया गया।
  • 1 जुलाई 1955 को इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया का राष्‍ट्रीयकरण कर इसका नाम स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (State Bank of India) कर दिया गया।
  • भारतीय बैंकिंग प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के लिए 1 जनवरी 1962 को भारत में बैंकों के लिए जमा निगम की स्‍थापना की गई।
  • 19 जुलाई 1969 को भारत सरकार ने 14 प्रमुख बैंकों का राष्ट्रीयकरण (Nationalisation) कर‍ दिया। इनकी जमा-पूंजी 50 करोड़ से अधिक थी।
  • 1974 में नरसिंहम समिति (Narasimham Committee) ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (Regional Rural Banks- RRB) की स्थापना की सिफारिश की।
  • 2 अक्टूबर 1975 को आरआरबी (Regional Rural Banks) को ग्रामीण और कृषि विकास के लिए ऋण की मात्रा बढ़ाने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था।
  • 15 अप्रैल 1980 में छह और बैंकों का राष्‍ट्रीयकरण (Nationalisation) कर दिया गया। इनकी जमा-पूंजी 200 करोड़ से अधिक थी। इस तरह 1980 तक 20 बैंकों का राष्‍ट्रीयकरण (Nationalisation of Banks) कर दिया गया।

उदारीकरण चरण (Liberalization Phase) (1991 से अब तक)

  • बैंकों को लाभ में लाने के लिए उनकी मॉनिटरिंग करना जरूरी था। राष्‍ट्रीयकृत पब्‍लिक सेक्‍टर बैंकों (Nationalized Public Sector Banks) को लाभ पहुंचाने और स्‍थायित्‍व देने (Profitability and Stability) के लिए सरकार ने एम नरसिंहम (M Narasimham) के नेतृत्‍व में कमेटी गठित करने का निर्णय लिया।
  • इस चरण में कई बड़े और छोटे बैंकों का विलय (Merger of Banks) कर दिया गया।
  • 1993 में न्‍यू बैंक ऑफ इंडिया (New Bank of India) को पंजाब नेशनल बैंक (Punjab National Bank) के साथ विलय (Merger) कर दिया। इस तरह 1993 में 19 ही राष्‍ट्रीयकृत बैंक (Nationalized Bank) रह गए।
  • इस चरण में आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank), एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank), एक्सिस बैंक (Axis Bank) सहित कई प्राइवेट बैंकों को भी काम करने की अनुमति दी गई।
Scroll to top