आरबीआई गवर्नरों की सूची (List of RBI Governors)

भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India-RBI) का गवर्नर (Governor) भारत के केंद्रीय बैंक का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Chief Executive Officer) और इसके केंद्रीय निदेशक मंडल (Central Board of Directors) का पदेन अध्यक्ष होता है।

आरबीआई गवर्नर की नियुक्‍त‍ि (Appointment of RBI Governor)

भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम 1934 (RBI Act 1934) की धारा 8 (1) (ए) में भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India-RBI) के गवर्नर की नियुक्ति को स्पष्ट किया है। इसके अनुसार आरबीआई के बोर्ड में एक गवर्नर और डिप्टी गवर्नर (Deputy Governor) केंद्र सरकार नियुक्त करती है।

आरबीआई गवर्नर की नियुक्ति प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा केंद्रीय वित्त मंत्री (Minister of Finance of India) की सिफारिश पर की जाती है।

रिज़र्व बैंक के गवर्नर का कार्यकाल 3 साल का होता है। इनकी पुनर्नियुक्‍त‍ि (Re-Appointment) की जा सकती है। इनके कार्यकाल को भी बढ़ाया (Extension) जा सकता है।

रिजर्व बैंक गवर्नर के कार्य (Functions of RBI Governor)

भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India-RBI) अर्थव्यवस्था में वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है। RBI गवर्नर RBI की नीतियों को तैयार करने में प्रमुख भूमिका निभाता है।

RBI Governor नए निजी और विदेशी बैंक खोलने के लिए लाइसेंस जारी करने के लिए जिम्मेदार है।

आरबीआई गवर्नर देश की जमा और उन्नति पर ब्याज दरों को नियंत्रित करता है।

आरबीआई गवर्नरों की सूची (List of RBI Governors)

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी भारतीय नोट पर भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के हस्ताक्षर रहते हैं। ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार द्वारा 1935 में अपनी स्थापना के बाद से अब तक 25 लोगों ने भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के रूप में काम किया है।

आस्‍बर्न ए. स्मिथ (Osborne A Smith) आरबीआई के पहले गवर्नर थे। चिंतामण द्वारकानाथ देशमुख (Chintaman Dwarakanath Deshmukh) आरबीआई के पहले भारतीय गवर्नर (First Indian Governor) थे।

शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) वर्त्तमान गवर्नर है। इन्होंने 11 दिसंबर 2018 को इस पद को संभाला है। शक्तिकांत दास RBI के 25वें गवर्नर हैं।

आस्‍बर्न ए. स्मिथ (Osborne A Smith): 1 अप्रैल 1935 – 30 जून 1937

आस्‍बर्न ए. स्मिथ (Osborne A Smith) भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India-RBI) के पहले गवर्नर थे। ये एक पेशेवर बैंकर थे।

इन्‍हें 1926 में इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया (Imperial Bank of India) का प्रबंधक गवर्नर बनाया। इन्‍होंने अपने कार्यकाल में किसी बैंक नोट पर हस्ताक्षर नहीं किए थे।

जेम्‍स ब्रेड टेलर (James Braid Taylor): 1 जुलाई 1937 – 17 फ़रवरी 1943

जेम्‍स ब्रेड टेलर (James Braid Taylor) भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर बनने से पहले डिप्टी गवर्नर (Deputy Governor) के पद पर आसीन थे।

आरबीआई गवर्नर (RBI Governor) पद पर रहते हुए इनका निधन हो गया।

चिंतामण द्वारकानाथ देशमुख (सी. डी. देशमुख) (Chintaman Dwarakanath Deshmukh): 11 अगस्त 1943 – 30 जून 1949

जेम्‍स ब्रेड टेलर (James Braid Taylor) के आकस्मि‍क निधन के बाद सी. डी. देशमुख (C.D. Deshmukh) को आरबीआई गवर्नर बनाया गया।

C.D. Deshmukh भारतीय रिजर्व बैंक के पहले भारतीय गवर्नर (First Indian RBI Governor) थे। इसी दौरान उन्हें सर की उपाधि दी गई थी।

अपने कार्यकाल के दौरान इन्‍होंने 1944 में ब्रेटन वुड्स वार्ता (Bretton Woods Negotiations) में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

बेनेगल रामा राव (Benegal Rama Rau): 1 जुलाई 1949 – 14 जनवरी 1957

बेनेगल रामा राव (Benegal Rama Rau) सबसे लंबे समय तक आरबीआई गवर्नर रहे। 7 साल 197 दिनों तक अपने पद पर आसीन रहे।

इन्‍होंने वित्त मंत्री (Finance Minister) के साथ मतभेदों के कारण अपने दूसरे कार्यकाल की अवधि समाप्त होने से पहले जनवरी 1957 के मध्य में इस्तीफा दे दिया।

के.जी. आंबेगांवकर (K G Ambegaonkar): 14 जनवरी 1957 – 28 फ़रवरी 1957

बेनेगल रामा राव (Benegal Rama Rau) के इस्तीफे के बाद एच.वी.आर. आयंगर (H V R Iengar) के पद संभालने तक इन्हें अंतरिम राज्यपाल (Interim Governor) के रूप में नियुक्त किया गया।

इन्‍होंने अपने कार्यकाल में किसी बैंक नोट पर हस्ताक्षर नहीं किए थे।

एच.वी.आर. आयंगर (H. V.R Iengar): 1 मार्च 1957 – 28 फ़रवरी 1962

एच.वी.आर. आयंगर (H. V.R Iengar) के कार्यकाल के दौरान 1962 में बैंक डिपॉजिट के लिए बीमा शुरू किया गया।

इन्‍होंने आरबीआई गवर्नर बनने से पहले भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India) के अध्यक्ष के तौर पर भी कार्य किया।

मौद्रिक नीति में ‘Variable Cash Reserve Ratio’ का पहली बार उपयोग किया गया था।

पी.सी. भट्टाचार्य (P.C. Bhattacharya): 1 मार्च 1962 – 30 जून 1967

पी.सी. भट्टाचार्य (P.C. Bhattacharya) ने आरबीआई गवर्नर बनने से भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन (Chairman) के पद पर काम किया।

इनके कार्यकाल में 1966 में Credit Authorisation Scheme की शुरुआत की गई।

लक्ष्‍मीकांत झा (Laxmikant Jha): 1 जुलाई 1967 – 3 मई 1970

लक्ष्‍मीकांत झा (Laxmikant Jha) ने आरबीआई गवर्नर बनने से पहले प्रधानमंत्री के सचिव (Secretary to the Prime Minister) के रूप में काम किया।

इनके कार्यकाल में वाणिज्यिक बैंकों पर सामाजिक नियंत्रण (Social Control over Banks) शुरू किया गया था।

1969 में 14 प्रमुख वाणिज्यिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण (Nationalisation of 14 Banks) किया गया।

इनका कार्यकाल पूरा होने से पहले मई 1970 में संयुक्त राज्य अमेरिका में भारत का राजदूत (India’s Ambassador) नियुक्त कर दिया।

बी.एन. आडारकर (B.N. Adarkar): 4 मई 1970 – 15 जून 1970

बी.एन. आडारकर (B.N. Adarkar) एक पेशेवर अर्थशास्त्री थे। इन्‍होंने एस. जगन्नाथन (S Jagannathan) के पदभार संभाले तब तक गवर्नर के पद संभाला।

एस. जगन्नाथन (S Jagannathan): 16 जून 1970 – 19 मई 1975

एस. जगन्नाथन (S Jagannathan) ने भारतीय रिज़र्व बैंक में गवर्नर के रूप में नियुक्त होने से पहले केंद्र सरकार के साथ विश्व बैंक (World Bank) में भारत के कार्यकारी निदेशक (Executive Director) के रूप में कार्य किया।

एन.सी. सेन गुप्‍ता (N. C. Sen Gupta): 19 मई 1975 – 19 अगस्त 1975

एन.सी. सेन गुप्‍ता (N.C. Sen Gupta) को के. आर. पुरी (K. R. Puri) के पद संभालने तक तीन महीने के लिए आरबीआई गवर्नर (RBI Governor) नियुक्त किया गया था।

इससे पहले वे पहले वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) के बैंकिंग विभाग के सचिव (Secretary) पद पर कार्यरत थे।

के. आर. पुरी (K. R. Puri): 20 अगस्त 1975 – 2 मई 1977

के. आर. पुरी (K. R. Puri) के कार्यकाल के दौरान क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (Regional Rural Banks-RRBs) की स्थापना की गई थी।

RBI गवर्नर बनने से पहले पुरी भारतीय जीवन बीमा निगम (Life Insurance Corporation of India) के चेयरमैन (Chairman) और प्रबंध निदेशक (Managing Director) पद पर कार्यरत थे।

एम. नरसिंहम (M Narasimham): 2 मई 1977 – 30 नवंबर 1977

एम. नरसिंहम (M Narasimham) रिजर्व बैंक कैडर (Reserve Bank Cadre) से नियुक्त होने वाले पहले और अब तक के एकमात्र गवर्नर थे।

ये आरबीआई में Economic Department में Research Officer के रूप में शामिल हुए थे। गवर्नर बनने से पहले उन्होंने Economic Affairs Department में Additional Secretary पद पर कार्यरत थे।

डॉ. आई.जी. पटेल (Dr. I. G. Patel): 1 दिसंबर 1977 – 15 सितंबर 1982

डॉ. आई.जी. पटेल (Dr. I. G. Patel) के कार्यकाल के दौरान छह निजी क्षेत्र के बैंकों का राष्ट्रीयकरण (Nationalisation of Private Sector Banks) किया गया था।

डिपॉजिट इंश्योरेंस (Deposit Insurance) और क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (Credit Guarantee Corporations) का विलय कर दिया और बैंक में एक विभागीय पुनर्गठन किया गया।

Dr. I. G. Patel ने 1981 में IMF के Extended Fund Facility का विस्तार करने में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

डॉ. मनमोहन सिंह (Dr. Manmohan Singh): 16 सितंबर 1982 – 14 जनवरी 1985

डॉ. मनमोहन सिंह (Dr. Manmohan Singh) के कार्यकाल में भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम (Reserve Bank of India Act) के अध्‍याय की शुरुआत हुई।

शहरी बैंक विभाग (Urban Banks Department) की स्‍थापना की गई।

आरबीआई गवर्नर बनने से पहले Dr. Manmohan Singh ने वित्त विभाग में सचिव (Secretary) और योजना आयोग (Planning Commission) के सदस्य सचिव (Member Secretary) के रूप में कार्य किया।

अमिताभ घोष (Amitabh Ghosh): 15 जनवरी 1985 – 4 फ़रवरी 1985

अमिताभ घोष (Amitabh Ghosh) सबसे कम समय के लिए आरबीआई गवर्नर रहे। ये मात्र 20 दिनों के लिए आरबीआई गवर्नर बनाए गए।

इन्‍होंने 1982 से आरबीआई में डिप्‍टी गवर्नर (Deputy Governor) पद पर कार्य किया।

आर.एन. मल्‍होत्रा (R. N. Malhotra): 4 फरवरी 1985 – 22 दिसंबर 1990

इनका पूरा नाम राम नारायण मल्‍होत्रा (Ram Narain) था। आर.एन. मल्‍होत्रा (R. N. Malhotra) के कार्यकाल में National Housing Bank की स्‍थापना की गई।

एस. वेंकिटरमनन (S Venkitaramanan): 22 दिसंबर 1990 – 21 दिसंबर 1992

एस. वेंकिटरमनन (S Venkitaramanan) के कार्यकाल में IMF के Stabilisation Programme को अपनाया गया, जहां रुपए का अवमूल्यन हुआ और आर्थिक सुधारों (Economic Reforms) के कार्यक्रम की शुरुआत हुई।

डॉ. सी. रंगराजन (Dr. C Rangarajan): 22 दिसंबर 1992 – 21 नवंबर 1997

डॉ. सी. रंगराजन (Dr. C Rangarajan) RBI Governor बनने से पहले एक दशक तक Deputy Governor पद पर रहे।

ये योजना आयोग (Planning Commission ) के सदस्य और दसवें वित्त आयोग (Tenth Finance Commission) के सदस्य भी थे।

डॉ. बिमल जालान (Dr. Bimal Jalan): 22 नवंबर 1997 – 6 सितंबर 2003

डॉ. बिमल जालान (Dr. Bimal Jalan) के कार्यकाल में उदारीकरण और बैंकिंग रिफॉर्म (Liberalisation and Economic Reforms) के क्षेत्र में कार्य किए।

इन्‍होंने भारत सरकार में मुख्य आर्थिक सलाहकार (Chief Economic Advisor), योजना आयोग (Planning Commission) के सदस्य सचिव (Member Secretary) के तौर पर कार्य किया।

डॉ. वाइ.वी. रेड्डी (Dr. Y. V. Reddy): 6 सितंबर 2003 – 5 सितंबर 2008

डॉ. यागा वेणुगोपाल रेड्डी (Dr. Yaga Venugopal Reddy) ने फाइनेंशियल सेक्‍टर रिफॉर्म, ट्रेड फाइनेंस के क्षेत्र में कई उल्‍लेखनीय कार्य किए।

2010 में इन्हें भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण (Padma Vibhushan) से सम्मानित किया गया था।

डॉ. डी. सुब्‍बाराव (Dr. D. Subbarao): 5 सितंबर 2008 – 4 सितंबर 2013

डॉ. डी. सुब्‍बाराव (Dr. D. Subbarao) ने भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर बनने से पहले भारत सरकार के वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) में वित्त सचिव (Finance Secretary) के रूप में कार्य किया।

इससे पहले 2005 से 2007 तक प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के प्रमुख सचिव (Prime Minister’s Economic Advisory Council) रहे।

डॉ. रघुराम राजन (रघुराम गोविंद राजन) (Dr. Raghuram Rajan): 4 सितंबर 2013 – 4 सितंबर 2016

डॉ. रघुराम राजन (Dr. Raghuram Rajan) भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India) के 23वें गवर्नर थे।

इससे पहले उन्‍होंने भारत सरकार के वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) में मुख्य आर्थिक सलाहकार (Chief Economic Advisor) और शिकागो विश्वविद्यालय के बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस में एरिक. जे. ग्लीचर फाईनेंस के गणमान्य सर्विस प्रोफेसर के रूप में कार्य किया।

2003 से 2006 तक वे अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund) के प्रमुख अर्थशास्त्री व अनुसंधान निदेशक रहे।

इन्‍हें 10 अक्टूबर 2014 को ‘यूरोमनी’ पत्रिका की ओर से 2014 के लिए ‘सर्वश्रेष्ठ केंद्रीय बैंक गवर्नर’ पुरस्कार दिया गया।

इनकी पुस्तक ‘फाल्ट लाइंस : हाउ हिडेन फ्रैक्चर्स स्टिल थ्रीटेन द वर्ल्ड इकॉनोमी’ (Fault Lines: How Hidden Fractures Still Threaten the World Economy) काफी चर्चित है।

डॉ. ऊर्जित पटेल (Dr. Urjit R. Patel): 4 सितंबर 2016 – 11 दिसंबर 2018

डॉ. ऊर्जित पटेल (Dr. Urjit R. Patel) भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India) के 24वें गवर्नर थे। ये पहले ऐसे आरबीआई गवर्नर (RBI Governor) जिन्‍होंने अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया।

इन्‍होंने गवर्नर बनने से पहले आरबीआई डिप्‍टी गवर्नर (Deputy Governor) पद पर कार्य किया।

शक्तिकान्त दास (Shaktikanta Das): 11 दिसंबर 2018 – पदस्थ

शक्तिकान्त दास (Shaktikanta Das) भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India) के 25वें गवर्नर है।

दास इससे पहले भारत के 15वीं वित्त आयोग (15th Finance Commission) और जी-20 शेरपा (G20 Sherpa of India) के सदस्य थे।

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